हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने दिल्ली में इसको लेकर एक बैठक दिया। इस बैठक में यह निर्णय लिया गया कि पार्टी किसानों के समर्थन में 16 जून से प्रदेशव्यापी अभियान में हिस्सा लेंगे। स्थानीय विधायको के अलावा पूर्व विधायको ने इस में उत्तम प्रतिसाद दर्शा रहे है।
भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि भाजपा सरकार किसानों की मांगों को लेकर गंभीर नहीं है। अगर स्वामीनाथन रिपोर्ट को लागू नहीं किया तो आंदोलन को और व्यापक करके इसे सड़क से संसद तक की लड़ाई बनाई जाएगी। उन्होंने कहा कि जिन किसानों के नाम पर राजनीति करके भाजपा ने सत्ता हथियाई, आज उन्हीं किसानों की छाती पर भाजपा सरकार गोली बरसा रही है। इससे शर्मनाक देश में कुछ नहीं हो सकता।
उन्होंने मांग किया कि हुड्डा ने कहा कि कच्चे तेल की कम कीमत से जितना मुनाफा पिछले तीन साल में केंद्र सरकार ने कमाया है, वह सारा पैसा किसानों का कर्ज माफ करने में इस्तेमाल किया जाए। बैठक में यह भी तय हुआ कि पहले चरण में 16 जून को पिपली (कुरुक्षेत्र), 21 जून को सिरसा, 25 जून को रेवाड़ी, 1 जुलाई को सोनीपत, 5 जुलाई को जींद तथा 7 जुलाई को नूंह जिले में किसानों के हक में धरने दिए जाएंगे।
हमारे Authors की राय :- यह न्यूज़ देख के सच में बहुत दुःख हो रहा है। वाकई में शर्मनाक घटना है ये की किसानों पे गोलिया चली और कोई किसानों से जबरदस्ती हमदर्दी जता रहे है।
किसान भाइयों को खुद से एक जुट होकर माननीय मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के कार्यालय के सामने जाकर एक शांत प्रदर्शन करके उनसे मुलाकात करनी चाहिये। और एक आश्वासन लेना चाहिए जो कि बहुत सटीक और पक्का हो और मीडिया के सामने एलान करवाना चाहिये। और हर 15 दिन में उसपे जांच करनी चाहिए कि काम कहा तक आया।
और उसके बाद भी निरंतर उनको बाधा ही पहुँचाहि जा रही है और कोई समस्या का हल नही निकला तो फिर प्रदर्शन इन्ही बड़े अधिकारियों के सामने जारी रखो। और मीडिया के भाइयों को भी सिर्फ किसान की हत्या और मौत को सनसनी खबर बनाने के बजाय किसान की समस्या को भी उतना ही उछाल के कवरेज देना चाहिए जितना उनके मौत तो TRP के लिए देते आ रहे है। जब तक किसान सुरक्षित नही है, हम लोग क्या खाएंगे। टेक्नोलॉजी सब कीच दे सकती है लेकिन कोई टेक्नोलॉजी ना किसान को पैदा कर सकती ना ही अनाज को। इसीलिए किसान मित्रों और सभी युवा मित्रों इस मुद्दे को सब लोग आगे बढ़ाए और इसको एक प्रमुख मुद्दा बनादो। TRENDING TOPIC बना दो इसे। और उस प्रांत के ग्रेजुएट्स से विनती है कि प्लीज इन राजनीति वाले नेता लोगो को साथ मत दो। खुद होकर अपने आपसे जाओ वहापे और प्रदर्शन करो। कारण ये है कि हुड्डाजी आये तो मीडिया का और समाज का फो उस उनपे रहेगा किसानों पे नही। जो पब्लिक ने उनको पिछली बार नकारा है वो इनकी प्रदर्शन के बात से बोलेगा की लो अब इस बार इनका चालू हो गया। इसीलिए खुदसे जाओ किसानों के साथ मे और शांत प्रदर्शन करो। नो मारा-मारी बस प्रदर्शन। आपने वोट दिया है और इनको वहापे अपनी सेवा के लिए चुना ह। हर एक को समय देना और उनकी तकलीफ को सुनना और काम करना ही इनकी नौकरी है। डरो मत। चलो अपना मुद्दा उठाये। महाराष्ट्र के किसानों ने देखो प्रदर्शन से ही मांगे पूरी करि है ना। और जैसे ही किसी बात का एलान किया जाए मीडिया में उस बात को भुला मत देना। डायरेक्ट डेट मांगो की कब होगा। बस। भाइयो जब GST जैसा बिल पूरी देश के कोने कोने में जाने के लिए एक तारीख फिक्स की जा सकती है, जब हर नागरिक के जेब मे पड़ी हुई नोट को बंद और चालू करने की तारीख तय की जा सकती है तो किसान के समस्या की तारीख क्यो नही की जा सकती। एलान के साथ साथ तारीख भी मांगो।
अगर आप मेरे विचार से सहमत हो तो फैला दो मेरी बात।
और उसके बाद भी निरंतर उनको बाधा ही पहुँचाहि जा रही है और कोई समस्या का हल नही निकला तो फिर प्रदर्शन इन्ही बड़े अधिकारियों के सामने जारी रखो। और मीडिया के भाइयों को भी सिर्फ किसान की हत्या और मौत को सनसनी खबर बनाने के बजाय किसान की समस्या को भी उतना ही उछाल के कवरेज देना चाहिए जितना उनके मौत तो TRP के लिए देते आ रहे है। जब तक किसान सुरक्षित नही है, हम लोग क्या खाएंगे। टेक्नोलॉजी सब कीच दे सकती है लेकिन कोई टेक्नोलॉजी ना किसान को पैदा कर सकती ना ही अनाज को। इसीलिए किसान मित्रों और सभी युवा मित्रों इस मुद्दे को सब लोग आगे बढ़ाए और इसको एक प्रमुख मुद्दा बनादो। TRENDING TOPIC बना दो इसे। और उस प्रांत के ग्रेजुएट्स से विनती है कि प्लीज इन राजनीति वाले नेता लोगो को साथ मत दो। खुद होकर अपने आपसे जाओ वहापे और प्रदर्शन करो। कारण ये है कि हुड्डाजी आये तो मीडिया का और समाज का फो उस उनपे रहेगा किसानों पे नही। जो पब्लिक ने उनको पिछली बार नकारा है वो इनकी प्रदर्शन के बात से बोलेगा की लो अब इस बार इनका चालू हो गया। इसीलिए खुदसे जाओ किसानों के साथ मे और शांत प्रदर्शन करो। नो मारा-मारी बस प्रदर्शन। आपने वोट दिया है और इनको वहापे अपनी सेवा के लिए चुना ह। हर एक को समय देना और उनकी तकलीफ को सुनना और काम करना ही इनकी नौकरी है। डरो मत। चलो अपना मुद्दा उठाये। महाराष्ट्र के किसानों ने देखो प्रदर्शन से ही मांगे पूरी करि है ना। और जैसे ही किसी बात का एलान किया जाए मीडिया में उस बात को भुला मत देना। डायरेक्ट डेट मांगो की कब होगा। बस। भाइयो जब GST जैसा बिल पूरी देश के कोने कोने में जाने के लिए एक तारीख फिक्स की जा सकती है, जब हर नागरिक के जेब मे पड़ी हुई नोट को बंद और चालू करने की तारीख तय की जा सकती है तो किसान के समस्या की तारीख क्यो नही की जा सकती। एलान के साथ साथ तारीख भी मांगो।
अगर आप मेरे विचार से सहमत हो तो फैला दो मेरी बात।
हम यहां पे न्यूज़ नही देते। हम न्यूज़ को पढ़ते है समझते है और विचार करते है। एक अनोखी न्यूज़ ब्लॉग और site है । आया करो।

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